जीवन के होते है कई रंग
जो हर पल बनते बिगड़ते रहते हैं
इन्द्रधनुष की तरह
बिजली की चमक के साथ
गरजते हुए बादलों की तरह
बरसती रहती है जिंदगी
लहराती बलखाती नदी की तरह
इठलाती है जिंदगी
पेडो में उगते नव-पल्लव
हहराती हवा में झूमते नाचते
सिखाते है जिंदगी को
एक नया सबक
उगती हुई धरती के सीने पर
खड़ी होती है जब अट्टालिकाएँ
जिंदगी बेबसी के आंसू रोती है
और जब आती है ऋतुएँ बदल-बदल कर
बदल देती है आबो हवा
बदलते रहतें है जिंदगी रंग
कभी सुख में
कभी दुःख में --
शुक्रवार, 12 जून 2009
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2 टिप्पणियां:
Indeed good poetry.
Bhavpurn aur sahaj abhivyakti.Badhai.
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