कायम है उम्मीदें युवाओं के जोश पर
जिनके कन्धों पर टिका है देश का भविष्य
जलाई थी राजीब गाँधी ने एक मशाल
जिसकी रौशनी में तुम बढे चलो
बनकर एक मशाल
तुम बन जाओ एक मिशाइल
क्योंकि तुम्हारे ही कन्धों पर टिका है देश का भविष्य
राह से भटकना मत
बहकावे में आना मत
बहादूर बनकर जीना है
बनना है दीन-दुखिओं का सहारा
तुम्हारे इरादे की बुलंदी से
रहे न कोई बेसहारा
बनकर कमजोर की लाठी
बिना भेदभाव आगे बढ़ना है
क्योंकि तुम्हारे ही कन्धों पर टिका है देश का भविष्य
कदम ठिठके नहीं
मन भटके नहीं
मंजिल तुम्हे पानी है
देश के सुनहरे भविष्य के लिए
छूना है नीले अम्बर को
क्योंकि तुम्हारे कन्धों पर ही टिका है देश का भविष्य
तुम्हे बनना है पवित्र पावन
नदी के शांत निर्मल जैसा
बहते रहना है अबाध गति से
कभी न देखना पीछे मुड़कर उग्रवाद से कभी न घबराना तुम
हिंसा का करना है मुकाबला
शांति की राह पर चलकर
तुम्हे करना है पूरा
महात्मा गाँधी का सपना
क्योंकि तुम्हारे ही कंधो पर टिका है देश का भविष्य ।
किशोर कुमार जैन
मंगलवार, 18 अगस्त 2009
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