शुक्रवार, 12 जून 2009

जीवन के होते है कई रंग
जो हर पल बनते बिगड़ते रहते हैं
इन्द्रधनुष की तरह

बिजली की चमक के साथ
गरजते हुए बादलों की तरह
बरसती रहती है जिंदगी

लहराती बलखाती नदी की तरह
इठलाती है जिंदगी
पेडो में उगते नव-पल्लव
हहराती हवा में झूमते नाचते
सिखाते है जिंदगी को
एक नया सबक

उगती हुई धरती के सीने पर
खड़ी होती है जब अट्टालिकाएँ
जिंदगी बेबसी के आंसू रोती है

और जब आती है ऋतुएँ बदल-बदल कर
बदल देती है आबो हवा
बदलते रहतें है जिंदगी रंग
कभी सुख में
कभी दुःख में --

बेबसी के आंसू

बुधवार, 3 जून 2009

अनाहूत सपने

आजकल नए-नए सपने
खड़ी करते है परेशानी
दौड़ने लगते है अविराम
कल्पना के घोडे
ब्रह्ममुहरत के सपने
सुना था होते है सच
जाने की कितनी कोशिस
लेकिन था सब निरर्थक
डूबे जा रहा हूँ अन्धकार कुँए की
असीम गहराई में
न ही कोई धरातल
न ही कोई सहारा
फ़िर भी नहीं कोई अंत
सुख भोगता है मन
कल्पना की उड़ान में
सच मानता है मन सपनों को ही
देखता है जिन्हें जागती आँखों से
लिखता हूँ कविताएँ एक
वजूदहीन ब्यक्ति की तरह
सपनों को ही सच मानकर
वजूद खोजता हूँ अपना 0