शुक्रवार, 1 जनवरी 2010

न लौटे कभी पर लौट कर आए नया साल
किशोर कुमार जैन

बीत गया वो सब कुछ जो पुराना था साल
अब तो सब कुछ नया-नया होगा
पुराने में भी कुछ नया था
नये में और भी नया होगा
दुख भरे उन क्षणों को भुलकर
सुख भरे उन क्षणों को याद करना है
उसी में अतीत अपनी खिङकींया खोल देगा
हवा के झोंके मे फङफङाता रहेगा
इतिहास का वो काला पन्ना

आसमान से सुरज की किरणें चमकेंगी
दे जाएगी सर्दी में गर्मी का अहसास
हवा के शीतल झोंके से शरीर ठिठुर जाएगा
उसी ठिठुरन में सिकुङती ये देह
पल-पल याद करेगी तुम्हारी उपस्थिति का अहसास
हर वक्त नयापन देगा प्रेम का वो ahsas

कैसे भूल जाऊं नये साल में
पुराने साल का सुख भरा इतिहास

रंग बिरंगे फूलों में बस रही वो महक
कभी न खत्म हो किसी भी दहशत में
खुन से बिखरी सङक में खिले वो फूल
कभी न याद दिलाए वो रक्ताक्त मंजरपीछे मुङकर न देखुं
बीते हुए समय को नये साल मे सब कुछ नया हो हे नये साल
फङफहाते हुए वो पन्ने भले ही उङ जाए
न लौटे कभी वो पर लौट कर आए नया साल

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