शनिवार, 24 जनवरी 2009

पोषक सदस्यों को अभिभावक सदस्य क्यों नहीं

बिल्कुल सही है ये सवाल। पोषक सदस्य के रूप में जो सेवाएँ ली जानी चाहिए उस तरह से उनका उपयोग नहीं लिया जा रहा। एक तरह से निराशाजनक स्थिति है । ख़ुद पोषक सदस्य भी भ्रम की स्थिति में है । सही चिंतन न होने की वजह से इस कार्य को करने में काफी मशक्कत करनी होगी चूँकि संविधान में इस तरह का कोई प्रावधान नही है।अतः मेरे विचार से एक सलाहकार के रूप में उनकी सेवाएँ ली जानी चाहिए। मंच के कार्यक्रम की सूचि में कई समितियां अलग अलग काम करती है । उनमे भी सलाहकार के रूप में उनसे मशविरा किया जाना चाहिए । इस तरह उन्हें सक्रिय बनाए रखने की पहल की जा सकती है। सामाजिक सरोकारों में उन्हें आगे रखकर उनका मार्गदर्शन लिया जा सकता है ।जब कभी समाज या इतर समाज के साथ मेल मिलाप अथवा सामाजिक संपर्क मजबूत बनाए रखने की प्रक्रिया हो तो पोषक सदस्यों की सहयोगिता बहुत लाभप्रद सिद्ध हो सकती है. किशोर कुमार जैन

1 टिप्पणी:

संगीता पुरी ने कहा…

बहुत सुंदर...आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है.....आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे .....हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।